हिमालयी गांवों में पंचायती राज चुनाव : रिश्तों में दरार या विकास की नई दिशा
हिमालयी गांवों में पंचायती राज चुनाव : रिश्तों में दरार या विकास की नई दिशा | Spiritual Himalaya Diaries हिमालयी गांवों में पंचायती राज चुनाव : रिश्तों में दरार या विकास की नई दिशा हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का नाम नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिकता और गांवों की आत्मा का प्रतीक है। हिमालयी गांवों में आज भी इंसानियत, भाईचारा, सहयोग और सामूहिक जीवन की झलक देखने को मिलती है। यहां रिश्तों की गर्माहट शहरों की चकाचौंध से कहीं अधिक गहरी होती है। लेकिन जब पंचायती राज चुनाव आते हैं, तब यही गांव कई बार आपसी मतभेद, गुटबाजी और व्यक्तिगत शत्रुता का केंद्र बन जाते हैं। पंचायती राज व्यवस्था भारत के लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है। इसका उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय लोगों को विकास से जोड़ना था। लेकिन वर्तमान समय में कई गांवों में चुनाव सेवा की भावना से अधिक सत्ता, अहंकार और निजी स्वार्थ का माध्यम बनते जा रहे हैं। “गांव की असली शक्ति उसकी एकता में होती है, और जब चुनाव उस एकता को तोड़ दें, तब ...