बर्फ़ में कराहती गौमाता : हिमाचल की सर्दी और भारत की कड़वी सच्चाई
बर्फ़ में कराहती गौमाता : हिमाचल की सर्दी और भारत की कड़वी सच्चाई बर्फ़ में कराहती गौमाता : आस्था, संवैधानिक सम्मान और आज की कड़वी सच्चाई हिमाचल प्रदेश की बर्फ़ से ढकी पर्वतमालाएँ देखने में जितनी मनोहारी लगती हैं, उतनी ही पीड़ा अपने भीतर समेटे रहती हैं। शीतकाल के दौरान जब पूरा पहाड़ी क्षेत्र बर्फ़ की सफ़ेद चादर से ढक जाता है, तब केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि वे मूक प्राणी भी संघर्ष करते हैं जिन्हें हम गौमाता कहकर पूजते हैं। आज हिमाचल के अनेक क्षेत्रों में बर्फ़ के बीच खड़ी, कांपती, भूखी और दम तोड़ती गायों को देखना केवल एक प्राकृतिक संकट नहीं, बल्कि हमारे समाज और शासन की संवेदनहीनता का आईना है। गाय : केवल पशु नहीं, भारतीय सभ्यता की आत्मा भारतीय संस्कृति में गाय को केवल एक पशु नहीं माना गया। ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, महाभारत और पुराणों में गाय को अघन्या (जिसे मारा न जाए), कामधेनु और माता कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल कहा गया — वे गौवंश के रक्षक और संवर्धक के रूप में पूजित हैं। भगवान शिव का वाहन नंदी गौवं...