प्रभु श्री गडूमी नाग जी की अनूठी देवपरंपरा: जतराला उत्सव में शमशरी महादेव जी के रथ पर ढाई घड़ी
हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में अनेक ऐसी देवपरंपराएँ प्रचलित हैं, जिनकी विशिष्टता आज भी स्थानीय समाज में जीवित है। इन्हीं में एक अनूठी परंपरा प्रभु श्री गडूमी नाग जी, जिन्हें काली नाग जी के नाम से भी जाना जाता है, से संबंधित है। जतराला उत्सव के दौरान जब प्रभु श्री त्रिलोकीनाथ शमशरी महादेव जी कोहिला पधारते हैं, तब एक निर्धारित समय पर महादेव जी के रथ पर मुख्य मोहरे का परिवर्तन किया जाता है और लगभग ढाई घड़ी के लिए प्रभु श्री गडूमी नाग जी का मोहरा स्थापित किया जाता है। इस विशेष अवसर पर पूजा की दिशा, धूप-पुष्प-भोग अर्पित करने की रीति और रथ से जुड़ी कार्यविधि सामान्य व्यवस्था से अलग होती है। यह लेख स्थानीय परंपरा के प्रत्यक्ष अनुभव और प्रचलित देवमान्यताओं के आधार पर इस विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को समझने का प्रयास है। जतराला उत्सव में प्रभु श्री गडूमी नाग जी अर्थात् काली नाग जी की विशेष देवपरंपरा। प्रभु श्री गडूमी नाग जी कौन हैं? प्रभु श्री गडूमी नाग जी हिमाचल प्रदेश के आनी क्षेत्र की स्थानीय देवसंस्कृति में विशेष स्थान रखते हैं। उन्हें काली नाग जी क...